अग्निपुराण · अध्याय २३
लक्ष्मीजी की सही स्थिति
देवी लक्ष्मी को भगवान नारायण के दाहिनी (दक्षिण) ओर होना चाहिए — न कि बाईं ओर जैसा अधिकांश आधुनिक चित्रों में दिखाया जाता है। साधारण बोलचाल में भी हम "सीताराम", "राधेश्याम", "लक्ष्मीनारायण" कहते हैं — अर्थात् शक्ति सदा दाहिनी तरफ होनी चाहिए।
गणितीय प्रमाण
दाएँ-बाएँ का विज्ञान
देवता के दाहिने भाग में सकारात्मक ऊर्जा और देवी के बाएँ भाग में सकारात्मक ऊर्जा होती है। इसीलिए पुरुष के दाहिने हाथ में और स्त्री के बाएँ हाथ में रक्षासूत्र (मौली) बाँधी जाती है। गणित का सिद्धांत: धन × धन = धन; ऋण × ऋण = धन।
देवी भागवत
नवार्ण मंत्र का सही क्रम
दुर्गाजी का प्रामाणिक नवार्ण मंत्र है: ॐ ऐं क्लीं ह्रीं — पहले बुद्धि (सरस्वती), फिर शक्ति (काली), फिर धन (लक्ष्मी)। प्रचलित उल्टे क्रम "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं" से सत्वगुण में वृद्धि नहीं होती।
पंचमुखी हनुमत् कवच
हनुमानजी का सही स्वरूप
हनुमानजी के बाएँ हाथ में गदा और दाहिने हाथ में संजीवनी पर्वत होना चाहिए — न कि आजकल के अधिकांश चित्रों में दिखाए अनुसार। पूँछ सदा दाहिनी ओर होनी चाहिए। हनुमानजी की भक्ति करने वाले बजरंग बाण का पाठ कदापि न करें — इससे हनुमानजी को ब्रह्मफाँस लगती है।
शास्त्र सिद्धांत
गणेशजी का प्रामाणिक स्वरूप
श्री गणेशजी की सूँड दाहिनी ओर होनी चाहिए। बाएँ हाथों में फरसा और पाश, दाहिने हाथों में अंकुश और मोदक (लड्डू) होना चाहिए। गणेशजी पर तेल, चाँदी का वर्क और माली पन्ना (रंगीन कागज) चढ़ाना एकदम गलत परंपरा है — इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
शिव पुराण
शिवलिंग और नंदी की स्थिति
भगवान शिव का मुख सदा पश्चिम दिशा में रहता है। शिवलिंग के पीछे या दाहिनी ओर तिलक नहीं लगाना चाहिए। नंदी को शिवलिंग के ठीक सामने दक्षिणमुखी स्थापित करना चाहिए। पार्वतीजी शिवजी के दाहिनी ओर, चंद्रमा और त्रिशूल बाईं ओर होने चाहिए।